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हरियाली तीज (मधुश्रवा तीज) का पर्व 31 जुलाई रविवार को : महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य।

श्रावण मास शुक्ल पक्ष की तृतीया को माता गौरा विरहाग्नि में तपकर महादेव से मिली थी।

जम्मू कश्मीर : श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। हरियाली तीज के विषय में श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने बताया हरियाली तीज का पर्व इस वर्ष सन् 2022 ई. रविवार 31 जुलाई को मनाया जाएगा।

हरियाली तीज का पर्व भगवान महादेव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। श्रावण मास शुक्ल पक्ष की तृतीया को माता गौरा विरहाग्नि में तपकर महादेव से मिली थी।और माता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने श्रावण शुक्ल पक्ष तृतीया के दिन ही माँ पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया था। यह तीज कई नामों से जानी जाती है। जैसे श्रावणी तीज,हरियाली तीज,कजली तीज या मधुश्रवा तीज आदि। इस दिन महिलाएंँ निर्जला व्रत करती है और श्रीगणेश जी मां पार्वती और शिव जी की पूजा एवं कथा करके पति की लंबी उम्र और सौभाग्य की प्रार्थना करती है। अच्छे वर की मनोकामना के लिए इस दिन कुंवारी कन्याएं भी व्रत रखती हैं। महिलाएं झूला झूलती हैं,अन्य राज्यों में अलग अलग रीति रिवाज है।

कोरोना महामारी के चलते घर में रहकर ही पूजा अर्चना करें। मंदिरों एवं घरों में सावन शुक्ल तृतीया-हरियाली तीज से रक्षाबंधन-पूर्णिमा तक हिंडोले सजाए जाते हैं।

जिस विवाहित लड़की के विवाह के बाद पहला सावन आया हो तो वह ससुराल में नहीं रहती है,वह मायके रहती है सावन में सुंदर पकवान पकाकर सिंधारा देने की परंपरा है जो ससुराल पक्ष अपनी बहू को उसके मायके जाकर देते हैं सिंधारे के रूप में महिला को सुहाग की सामग्री, मेहंदी, हरी चूड़ियां, हरी साड़ी, घर के बने स्वादिष्ट पकवान,मिठाइयां, गुजिया, मठरी,फल,फैनी आदि दी जाती हैं सिंधारा देने के कारण ही इस तीज को सिंधारा तीज भी कहा जाता है सिंधारा सास और बहु के आपसी प्रेम और स्नेह का प्रतिनिधित्व करता है।

महंत रोहित शास्त्री (ज्योतिषाचार्य) अध्यक्ष श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट (पंजीकृत)
संपर्क सूत्र 7006711011

Editor JK News Updates

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